Quantcast
Channel: ARVIND SISODIA
Viewing all articles
Browse latest Browse all 3357

भारत को महाशक्ति बनने से रोकने के लिए हिंदुत्व में विभाजन के षड्यंत्र — अरविन्द सिसोदिया

$
0
0
भारत को महाशक्ति बनने से रोकने के लिए हिंदुत्व में विभाजन के षड्यंत्र — अरविन्द सिसोदिया

भारत को महाशक्ति बनाने के लिए हिंदुत्व की मजबूत एकता जरूरी — अरविन्द सिसोदिया

कोटा, 18 जुलाई। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने हिंदू विभाजन के चल रहे विश्वस्तरीय षड्यंत्रों तथा "डीप स्टेट"की इसमें बढ़ती रुचि और अमेरिकी अरबपति निवेशक जॉर्ज सोरोस द्वारा मोदी सरकार विरुद्ध अनापसनाप बकबासों और भारत में अराजकता फैलाने की विपक्ष की विविध कोशिशों को एक साथ जोड़ते हुए, इन्हें "भारत को महाशक्ति बनने से रोकने का षड्यंत्र बताया है। "उन्होंने कहा कि, "भारत की मजबूती के लिए हिंदुत्व की मजबूत एकता जरूरी है। भारत और हिंदुत्व एक हैं। हिंदुत्व ही भारत की राष्ट्रीयता है। देशहित में हिंदुत्व को मोदीजी के साथ दृढ़ता से खड़ा रहना होगा।"

सिसोदिया ने कहा कि, "जब से भारत में हिंदुत्ववादी मोदीजी की सरकार बनी है और भारत तेजी से महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर हुआ है, तब से वैश्विक स्तर पर मोदीजी की सरकार, हिंदुत्व और सनातन के विरुद्ध व्यापक अभियानों की बाढ़ आई है। भारत में भी उन्हें बैकअप देने के लिए समय-समय पर दिए गए विवादित राजनीतिक बयानों, आंदोलनों और तुष्टिकरणवादी दलों में आपसी समन्वय दिखाई देता है। यह केवल राजनीतिक मतभेद नहीं, बल्कि हिंदू पहचान, आस्था और सांस्कृतिक विरासत को समाप्त करने का सुनियोजित षड्यंत्र है। साथ ही भारत को महाशक्ति बनने से रोकने के लिए उसे भीतर से कमजोर करने की बड़ी कोशिश भी है।"

सिसोदिया ने कहा कि, "अमेरिका और यूरोप के कुछ प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में सांप्रदायिक संस्थाओं के साथ मिलकर आयोजित 'डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व'जैसे सम्मेलन इस अभियान के प्रमुख सबूत हैं। इन मंचों पर हिंदू धर्म, उसके ग्रंथों, भगवान, धार्मिक प्रतीकों और परंपराओं को कठघरे में खड़ा किया जाता है। उनके प्रति अविश्वास उत्पन्न किया जाता है। इनका मूल उद्देश्य हिंदुत्व को विखंडित करना है, जिससे राष्ट्रवादी सरकार का वोट बैंक प्रभावित किया जा सके। इन बहुअयामी षड्यंत्रों के विरुद्ध भारत को एक जुट रहना होगा।."

सिसोदिया ने कहा कि, "पूरे विश्व में अनेक देशों में राज्य-धर्म है अथवा किसी धर्म विशेष के प्रति संरक्षणवादी या सम्मानजनक व्यवस्था है। किंतु केवल हिंदू की सांस्कृतिक चेतना को वैश्विक खतरे के रूप में प्रस्तुत किया जाना भारत के विरुद्ध एक गहरा और बड़ा षड्यंत्र है। इसे भारत के हिंदुत्व को समझना भी होगा और एकजुटता से इसका प्रतिकार भी करना होगा।"

सिसोदिया ने कहा कि, "प्रधानमंत्री मोदीजी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती आर्थिक, सामरिक और वैश्विक भूमिका के समानांतर उसकी सांस्कृतिक पहचान को भी चुनौती देने का प्रयास हो रहा है। इसलिए इसे केवल धार्मिक नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक षड्यंत्रपूर्ण अभियान के रूप में देखा-समझा जाना चाहिए।"

सिसोदिया नें आरोप लगाया कि "शाहीन बाग,सिंधु बॉर्डर,शंभु बॉर्डर, लाल किले पर ख़ालिस्तानी झंडा फहराने की कोशिश, वोट चोरी आरोप, राममंदिर चढ़ावा चोरी को तिल का ताड़ बनानाऔर 
अब जंतर मंतर यह सब विदेशी दिमाग़ और फंडिंग्स से उत्पन्न किए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर लाखों फर्जी एकाउन्टस के सहारे आराकतावादी दुष्प्रेरणाऐं फैलाई जा रहीं हैं,इन्हें देश को समझना होगा।  इनमें से किसी को छात्रों से, किसानों से, कोई लेना देना नहीं है। अब यूपी चुनाव मुख्यनिशाने पर है। उनका मकसद सिर्फ और सिर्फ हिंदू एकता तोड़ो, आराजकता उत्पन्न करो का है। इसे सभी भारतीयों को समझना होगा।

सिसोदिया ने कहा कि, "भारत में भी अनेक विपक्षी नेताओं के बयान विदेशी षड्यंत्र को अपरोक्ष समर्थन देते हुए अथवा 'कवर फायर'प्रदान करते हुए दिखाई देते हैं। जहां कांग्रेस के राहुल गांधी ने हिंदुत्व पर ही अनेकों आक्रमण किए, इसी प्रकार पूर्व केंद्रीय मंत्रियों सुशील कुमार शिंदे और पी. चिदंबरम के समय 'भगवा आतंकवाद'और 'हिंदू आतंकवाद'जैसी शब्दावली का प्रयोग भी सोची-समझी रणनीति थी। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी कई अवसरों पर आरएसएस को लेकर विवादित टिप्पणियां कीं।वहीं तमिलनाडु में राज्य सरकार के मंत्री रहे उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया और कोरोना जैसी बीमारियों से करते हुए इसे समाप्त करने की बात कही थी। डीएमके सांसद ए. राजा ने इसकी तुलना एचआईवी और कुष्ठ रोग से की। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के तत्कालीन नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस पर आपत्ति जताते हुए प्रतिबंध की मांग की, जबकि बिहार के तत्कालीन शिक्षा मंत्री चन्द्रशेखर ने रामचरितमानस को समाज में नफरत फैलाने वाला ग्रंथ बताया। ।"

सिसोदिया ने कहा कि, "कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी के नेतृत्व में राष्ट्रीय सलाहकार परिषद द्वारा तैयार सांप्रदायिक हिंसा निवारण विधेयक, मनमोहन सिंह सरकार के समय लाया गया था, जो मूलतः बहुसंख्यक हिंदू विरोधी था। यह विधेयक इस बात का सबूत है कि कांग्रेस हिन्दुओं के प्रति दुर्भावनाग्रस्त है और घोर तुष्टिकरणवादी है।"

सिसोदिया ने कहा कि, "हिंदुत्व पर आक्रमण और उसे विभाजित करने के षड्यंत्र के पीछे सत्ता का स्वार्थ तो है ही, साथ ही मुख्य लक्ष्य भारत को तेजी से अग्रणी महाशक्ति बना रही मोदीजी की सरकार को रोकना, उलझाए रखना और अपदस्थ करना है। इसलिए जहां हिंदुत्व के हित में सनातन समाज को एकजुट रहना होगा, वहीं भारत के हित में भी सनातन समाज को मोदीजी के साथ दृढ़ता से खड़ा रहना होगा।"

भवदीय
अरविन्द सिसोदिया
मो. 9414180151






भारत को महाशक्ति बनने से रोकने के लिए हिंदुत्व में विभाजन के षड्यंत्र — अरविन्द सिसोदिया

भारत को महाशक्ति बनाने के लिए हिंदुत्व की मजबूत एकता जरूरी — अरविन्द सिसोदिया

कोटा, 18 जुलाई। राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के शिक्षा प्रोत्साहन प्रन्यासी एवं वरिष्ठ बुद्धिजीवी अरविन्द सिसोदिया ने हिंदू विभाजन के चल रहे विश्वस्तरीय षड्यंत्रों तथा  "डीप स्टेट"की इसमें बढ़ती रुचि और अमेरिकन उद्योगपती जॉर्ज सोरस द्वारा मोदीजी की सरकार गिराने की घोषणा को, भारत में आराजकता फैलाने ककी विविध कोशिशोँ को भारत को महाशक्ति बनने से रोकने का षड्यंत्र बताते हुए कहा कि, "भारत की मजबूती के लिए हिंदुत्व की मजबूत एकता जरूरी है। भारत और हिंदुत्व एक हैं। देशहित में हिंदुत्व को मोदीजी के साथ दृढ़ता से खड़ा रहना होगा।"

सिसोदिया ने कहा कि, "जब से भारत में हिंदुत्ववादी मोदीजी की सरकार बनी है और भारत तेजी से महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर हुआ है, तब से वैश्विक स्तर पर हिंदुत्व और सनातन के विरुद्ध व्यापक अभियानों की बाढ़ आई है। भारत में भी उन्हें बैकअप देने के लिए समय-समय पर दिए गए विवादित राजनीतिक बयानों और तुष्टिकरणवादी दलों में आपसी समन्वय दिखाई देता है। यह केवल राजनीतिक मतभेद नहीं, बल्कि हिंदू पहचान, आस्था और सांस्कृतिक विरासत को समाप्त करने का सुनियोजित षड्यंत्र है। साथ ही भारत को महाशक्ति बनने से रोकने के लिए उसे भीतर से कमजोर करने की बड़ी कोशिश भी है।"

सिसोदिया ने कहा कि, "अमेरिका और यूरोप के कुछ प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में सांप्रदायिक संस्थाओं के साथ मिलकर आयोजित 'डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व'जैसे सम्मेलन इस अभियान के प्रमुख सबूत हैं। इन मंचों पर हिंदू धर्म, उसके ग्रंथों, भगवान, धार्मिक प्रतीकों और परंपराओं को कठघरे में खड़ा किया जाता है। उनके प्रति अविश्वास उत्पन्न किया जाता है। इनका मूल उद्देश्य हिंदुत्व को विखंडित करना है, जिससे राष्ट्रवादी सरकार का वोट बैंक प्रभावित किया जा सके।"

सिसोदिया ने कहा कि, "पूरे विश्व में अनेक देशों में राज्य-धर्म है अथवा किसी धर्म विशेष के प्रति संरक्षणवादी या सम्मानजनक व्यवस्था है। किंतु केवल हिंदू की सांस्कृतिक चेतना को वैश्विक खतरे के रूप में प्रस्तुत किया जाना भारत के विरुद्ध एक गहरा और बड़ा षड्यंत्र है। इसे भारत के हिंदुत्व को समझना भी होगा और एकजुटता से इसका प्रतिकार भी करना होगा।"

सिसोदिया ने कहा कि, "प्रधानमंत्री मोदीजी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती आर्थिक, सामरिक और वैश्विक भूमिका के समानांतर उसकी सांस्कृतिक पहचान को भी चुनौती देने का प्रयास हो रहा है। इसलिए इसे केवल धार्मिक नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक षड्यंत्रपूर्ण अभियान के रूप में देखा समझा जाना चाहिए।"

सिसोदिया ने कहा कि, "भारत में भी अनेक विपक्षी नेताओं के बयान विदेशी षड्यंत्र को अपरोक्ष समर्थन देते हुए अथवा 'कवर फायर'प्रदान करते हुए दिखाई देते हैं। जहां कांग्रेस के राहुल गांधी ने हिंदुत्व पर ही अनेकों आक्रमण किये, वहीं तमिलनाडु में राज्य सरकार के मंत्री रहे उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया और कोरोना जैसी बीमारियों से करते हुए इसे समाप्त करने की बात कही थी। डीएमके सांसद ए. राजा ने इसकी तुलना एचआईवी और कुष्ठ रोग से की। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के तत्कालीन नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस पर आपत्ति जताते हुए प्रतिबंध की मांग की, जबकि बिहार के तत्कालीन शिक्षा मंत्री चन्द्रशेखर ने रामचरितमानस को समाज में नफरत फैलाने वाला ग्रंथ बताया। इसी प्रकार पूर्व केंद्रीय मंत्रियों सुशील कुमार शिंदे और पी. चिदंबरम के समय 'भगवा आतंकवाद'और 'हिंदू आतंकवाद'जैसी शब्दावली का प्रयोग भी सोची-समझी रणनीति थी। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी कई अवसरों पर आरएसएस को लेकर विवादित टिप्पणियां कीं। "

सिसोदिया नें कहा कि "कांग्रेस प्रमुख सोनिया गाँधी के नेतृत्व में राष्ट्रीय सलाहकार परिषद द्वारा तैयार सांप्रदायिक हिंसा निवारण विधेयक, मनमोहन सिंह सरकार के समय लाया गया था,मूलतः बहुसंख्यक हिंदू विरोधी था। यह विधेयक इस बात का सबूत है कि कांग्रेस हिन्दुओं के प्रति दुर्भावनाग्रस्त है और घोर तुष्टिकरणवादी है। "

सिसोदिया ने कहा कि, "हिंदुत्व पर आक्रमण और उसे विभाजित करने के षड्यंत्र के पीछे सत्ता का स्वार्थ तो है ही, साथ ही मुख्य लक्ष्य भारत को तेजी से अग्रणी महाशक्ति बना रही मोदीजी की सरकार को रोकना, उलझाए रखना और अपदस्थ करना है। इसलिए जहां हिंदुत्व के हित में सनातन समाज को एकजुट रहना होगा, वहीं भारत के हित में भी सनातन समाज को मोदीजी के साथ दृढ़ता से खड़ा रहना होगा।"

भवदीय
अरविन्द सिसोदिया
मो. 9414180151




===============




हिंदुत्व पर चौतरफा आक्रमण के षड्यंत्र, सनातन एक जुटता से  परास्त होगी - अरविन्द सिसोदिया

वैश्विक स्तर पर 'डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व' (Dismantling Global Hindutva) जैसे सम्मेलनों और अभियानों ने दुनिया भर के हिंदू समाज और विचारकों के बीच एक गंभीर बहस को जन्म दिया है। इस नैरेटिव (विमर्श) के पीछे छिपे कुतर्कों, इसके वैश्विक प्रभाव और हिंदू संगठनों द्वारा दिए जा रहे जवाबों का व्यापक विश्लेषण निम्नलिखित है: 
## 1. वैचारिक कुतर्क और हिंदू संगठनों की आपत्तियां
वैश्विक मंचों या पश्चिमी अकादमिक (Academic) सर्किलों में हिंदुत्व के खिलाफ जो तर्क दिए जाते हैं, उन्हें हिंदू समुदाय और कई विशेषज्ञ 'हिंदूफोबिया' (Hinduphobia) और दोहरे मानदंडों से प्रेरित मानते हैं: 

* धर्म और राजनीति का जानबूझकर भ्रम: इस तरह के अभियानों में दावा किया जाता है कि वे केवल 'राजनीतिक हिंदुत्व'की आलोचना कर रहे हैं, न कि हिंदू धर्म की। लेकिन व्यावहारिक रूप से, चर्चाओं में हिंदू ग्रंथों, प्रतीकों (जैसे भगवान राम) और रीति-रिवाजों पर ही आक्षेप लगाए जाते हैं, जिससे आम हिंदू की आस्था आहत होती है। 
* हिंदू पहचान का अपराधीकरण: पश्चिमी विमर्श में अक्सर बहुसंख्यकवाद (Majoritarianism) और राष्ट्रवाद के नाम पर भारतीय और वैश्विक हिंदू प्रवासियों (Diaspora) को निशाना बनाया जाता है। आलोचक इसे हिंदू पहचान को वैश्विक स्तर पर बदनाम (Demonize) करने का प्रयास मानते हैं। 
* एकतरफा नैरेटिव और दोहरे मानदंड: हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) जैसे संगठनों का तर्क है कि दुनिया के कई देशों में आधिकारिक या विशेष दर्जा प्राप्त राज्य-धर्म (State Religions) हैं, लेकिन केवल हिंदू बहुसंख्यक समाज की सांस्कृतिक चेतना को ही वैश्विक खतरे के रूप में पेश किया जाता है। 

## 2. वैश्विक अभियानों का मुख्य केंद्र और पृष्ठभूमि

* पश्चिमी विश्वविद्यालय: 'डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व'जैसे सम्मेलनों को अमेरिका और यूरोप के कई बड़े विश्वविद्यालयों के कुछ विभागों और वामपंथी झुकाव वाले विचारकों का समर्थन मिला। 
* भू-राजनीतिक (Geopolitical) लॉबिंग: कई विश्लेषक मानते हैं कि ये अभियान केवल धार्मिक नहीं हैं। भारत की बढ़ती आर्थिक और वैश्विक ताकत को रोकने के लिए अकादमिक जगत और मीडिया के एक वर्ग द्वारा यह एक रणनीतिक टूल (Strategic Tool) के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। [9] 

## 3. इन चुनौतियों से निपटने के लिए व्यावहारिक और एकजुट कदम
सद्गुरु जग्गी वासुदेव और कोहना (CoHNA) जैसे वैश्विक हिंदू संगठनों के अनुसार, ऐसे कुतर्कों को केवल गुस्से से नहीं, बल्कि बौद्धिक सुदृढ़ता और आंतरिक सुधारों से परास्त किया जा सकता है: 
## क) बौद्धिक और तार्किक मुकाबला (Intellectual Counter)

* तथ्य आधारित विमर्श: पश्चिमी मंचों पर अकादमिक शोध, लेखों और कानूनी माध्यमों से हिंदू विरोधी विमर्श का मजबूती से प्रतिवाद करना।
* विदेशी प्रवासियों (Diaspora) की सक्रियता: अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा जैसे देशों में रहने वाले हिंदुओं को वहां की स्थानीय राजनीति और मानवाधिकार मंचों पर अपनी आवाज मुखर करनी होगी, जैसा कि कैलिफोर्निया और अन्य जगहों पर जातिगत कानूनों के दुरुपयोग के खिलाफ देखा गया है। [3, 4, 10] 

## ख) आंतरिक सामाजिक एकता (Internal Strengthening)

* जातिवाद और भेदभाव का अंत: आंतरिक स्तर पर हिंदुत्व को कमजोर करने वाले सबसे बड़े कारक सामाजिक भेदभाव और ऊंच-नीच हैं। जब तक समाज के हर वर्ग को बराबरी और सम्मान नहीं मिलेगा, बाहरी ताकतों को फूट डालने का मौका मिलता रहेगा।
* सनातन के वैज्ञानिक पक्ष का प्रसार: नई पीढ़ी को केवल परंपराएं सौंपने के बजाय सनातन धर्म के तार्किक, दार्शनिक और कल्याणकारी (वेल-बीइंग) विज्ञान से परिचित कराना, जिससे वे वैश्विक मंचों पर भ्रमित न हों।

आप इस विषय में और क्या जानना चाहते हैं? क्या हम इसके कानूनी और भू-राजनीतिक (Geopolitical) प्रभावों पर चर्चा करें, या वैश्विक हिंदू संगठनों की रणनीति पर?

भारत में विपक्षी राजनेताओं द्वारा हिंदुत्व, सनातन धर्म और उससे जुड़े प्रतीकों पर दिए गए बयानों ने समय-समय पर बड़े राजनीतिक और सामाजिक विवादों को जन्म दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कई हिंदू संगठन इन बयानों को 'हिंदू विरोधी'और तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा मानते हैं, जबकि विपक्षी दल इन्हें राजनीतिक विचारधारा (भाजपा की राजनीति) पर हमला बताते हैं।
भारत में इस विषय से जुड़े प्रमुख बयानात, विवाद और उनके पीछे के विमर्श निम्नलिखित हैं:
## 1. 'सनातन धर्म'की तुलना बीमारियों से करने का विवाद
विपक्षी नेताओं के बयानों में सबसे बड़ा विवाद द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के नेताओं की टिप्पणियों से खड़ा हुआ:

* उदयनिधि स्टालिन का बयान: तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने एक सम्मेलन में सनातन धर्म की तुलना 'मलेरिया, डेंगू और कोरोना'से करते हुए इसे पूरी तरह समाप्त करने की बात कही थी। उनका तर्क था कि सनातन धर्म सामाजिक असमानता और जातिवाद को बढ़ावा देता है। 
* ए. राजा का बयान: DMK सांसद ए. राजा ने इस विवाद को आगे बढ़ाते हुए सनातन धर्म की तुलना 'एचआईवी (HIV)'और कुष्ठ रोग जैसी सामाजिक बीमारियों से कर दी थी, जिस पर देशव्यापी आक्रोश देखा गया।

2. रामचरितमानस और हिंदू ग्रंथों पर टिप्पणियांउत्तर प्रदेश और बिहार के क्षेत्रीय विपक्षी नेताओं द्वारा हिंदू धार्मिक ग्रंथों पर दिए गए बयानों ने भी काफी सुर्खियां बटोरीं:

स्वामी प्रसाद मौर्य (सपा): उत्तर प्रदेश के तत्कालीन सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों को दलित और महिला विरोधी बताते हुए उन पर प्रतिबंध लगाने या उन्हें संशोधित करने की मांग की। उनके समर्थकों द्वारा ग्रंथ की प्रतियां जलाने की घटनाएं भी सामने आईं।

चन्द्रशेखर (आरजेडी): बिहार के तत्कालीन शिक्षा मंत्री और आरजेडी नेता चन्द्रशेखर ने भी रामचरितमानस को समाज में नफरत फैलाने वाला ग्रंथ बताया था, जिसका खुद उनकी सरकार के भीतर भी विरोध हुआ था।

और हिंदू ग्रंथों पर टिप्पणियां
उत्तर प्रदेश और बिहार के क्षेत्रीय विपक्षी नेताओं द्वारा हिंदू धार्मिक ग्रंथों पर दिए गए बयानों ने भी काफी सुर्खियां बटोरीं:

* स्वामी प्रसाद मौर्य (सपा): उत्तर प्रदेश के तत्कालीन सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों को दलित और महिला विरोधी बताते हुए उन पर प्रतिबंध लगाने या उन्हें संशोधित करने की मांग की। उनके समर्थकों द्वारा ग्रंथ की प्रतियां जलाने की घटनाएं भी सामने आईं।
* चन्द्रशेखर (आरजेडी): बिहार के तत्कालीन शिक्षा मंत्री और आरजेडी नेता चन्द्रशेखर ने भी रामचरितमानस को समाज में नफरत फैलाने वाला ग्रंथ बताया था, जिसका खुद उनकी सरकार के भीतर भी विरोध हुआ था। 

## 3. 'हिंदू आतंकवाद'और 'भगवा आतंकवाद'का विमर्श
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के कुछ वरिष्ठ नेताओं द्वारा अतीत में दिए गए बयानों को हिंदू समाज पर सीधे आक्रमण के रूप में देखा जाता है:

* शब्दावली का प्रयोग: सुशील कुमार शिंदे और पी. चिदंबरम जैसे पूर्व गृह मंत्रियों के कार्यकाल के दौरान 'भगवा आतंकवाद' (Saffron Terror) या 'हिंदू आतंकवाद'जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया था।
* दिग्विजय सिंह के बयान: कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कई बार आरएसएस (RSS) और दक्षिणपंथी संगठनों की तुलना आतंकवादी विचारधाराओं से की, जिसे भाजपा ने पूरे हिंदू समाज और उसके पवित्र रंग (भगवा) को बदनाम करने की साजिश बताया।

## 4. राहुल गांधी के संसद और रैलियों के बयान
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों पर भी लगातार तीखी बहस होती रही है:

* 'हिंदू'बनाम 'हिंदुत्ववादी': राहुल गांधी ने अपनी रैलियों में कई बार स्पष्ट अंतर करने की कोशिश की कि "मैं हिंदू हूं, लेकिन हिंदुत्ववादी नहीं हूं।"उनके अनुसार, हिंदू सत्य की खोज करता है जबकि हिंदुत्ववादी केवल सत्ता चाहता है और नफरत फैलाता है।
* संसद में बयान: लोकसभा में विपक्ष के नेता के तौर पर राहुल गांधी के एक बयान पर भारी हंगामा हुआ था, जिसमें उन्होंने भाजपा की राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा था कि "जो लोग खुद को हिंदू कहते हैं, वे चौबीसों घंटे हिंसा और नफरत फैलाते हैं।"भाजपा ने इसे देश के सभी हिंदुओं का अपमान करार दिया था।

## 5. इन आक्रमणों के पीछे का राजनीतिक नैरेटिव (विपक्ष का तर्क)
विपक्षी दल अपने इन बयानों और रुख के पीछे निम्नलिखित तर्क देते हैं:

* समानता और सामाजिक न्याय: विपक्ष (विशेषकर द्रविड़ और क्षेत्रीय दल) का दावा है कि वे हिंदू धर्म के विरोधी नहीं हैं, बल्कि वे उस व्यवस्था (ब्राह्मणवाद या जातिवाद) के खिलाफ हैं जो समाज के पिछड़े और शोषित वर्गों के साथ भेदभाव करती है।
* भाजपा को घेरने की रणनीति: विपक्ष का मानना है कि भाजपा 'हिंदुत्व'को राष्ट्रवाद से जोड़कर राजनीतिक लाभ लेती है। इसलिए, वे हिंदुत्व की आलोचना को भाजपा की राजनीतिक विचारधारा की आलोचना के रूप में पेश करते हैं।



Viewing all articles
Browse latest Browse all 3357

Latest Images

Trending Articles


बहुत ही गन्दी शायरियांबहुत ही गन्दी शायरियां


बाइक चालक ने बुजुर्ग को मारी टक्कर, इलाज के दौरान मौत


बहुत ही गजब की WhatsApp Statusबहुत ही गजब की WhatsApp Status


जानवरों के प्रति दया, करुणा पैदा करने वाले सर्वश्रेष्ठ कोट्स


बिना छतरी का सेटअप बॉक्स कौन सा होता है?


तंवर वंश की कुलदेवी : चिलाय माता


सावन आया बादल छाए - Saawan Aaya Baadal Aaye (Sadhana Sargam, Kumar Sanu,...


माई मैं तो लियो है सांवरिया मोल' --- मीराबाई : हिंदी की पहली स्त्रीवादी :...


Brief Information of Karnataka in Hindi - कर्नाटक एक नजर में


बिश्रामपुर में मारपीट और मानसिक उत्पीड़न से तंग आकर मायके लौटी डॉक्टर, दहेज...


लड़कियों से बात करने का नंबर यहां प्राप्त करे | 100% Free Ladki Ka Number


US-Iran war : ईरान का सनसनीखेज दावा- अमेरिका ने बुशेहर परमाणु संयंत्र पर किया...


43 FAMOUS HINDU BANIYA VAISHYA LEADERS OF SANATANA BHARAT


इमाम हुसैन का वो पहला सफर जो कर्बला पे जा के ख़त्म हुआ | मदीने से मक्का 28 रजब


हिन्दी कैलेंडर तिथि ,वार ,अंग्रेजी तारीख सहित - Calendar अक्टूबर,2015


लोक देवता हरभु जी (हड़बू जी) सांखला


तेरे दर पर आने के काबिल नहीं हूँ |


Top 65 Kitchen Tips with PDF in Hindi – टॉप 65 किचन टिप्स पीडीऍफ़ हिंदी में


पुलिस की दौड़, चोर की मौज! सारा माल बरामद होते ही बदला पीड़ित का मूड


राम मंदिर ट्रस्ट ने जारी किया 3264 करोड़ के चढ़ावे का हिसाब, SIT रिपोर्ट में...



Latest Images